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“जब विचार सो जाते हैं, परंपराएं शासन करने लगतीं हैं”
सिविक सेंस (Civic Sense)
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एक पिता और बेटी के संवादों के माध्यम से यह किताब उन सवालों से रूबरू कराती है, जिन्हें हम अक्सर देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। यह किसी विचारधारा का प्रचार नहीं करती, बल्कि सोचने, प्रश्न करने और स्वयं उत्तर खोजने का निमंत्रण देती है।
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पाठकों की नज़र में ‘सिविक सेंस’ — वास्तविक प्रतिक्रियाएं
★★★★★ 5 / 5 (10 समीक्षाएं)



सिविक सेंस कहने में तो ये एक शब्द भर हो सकता है लेकिन इसकी गहराई में जाने पर ये जान पाते हैं कि जिस इंसान के अंदर ये सेंस आजाता है वो कंही भी अनुशासनहीनता का हिस्सा नहीं होगा,, किसी हिंसक भीड़ का हिस्सा नहीं होगा, उसे किसी कानून के पालन के लिए टोकना नहीं पड़ेगा। ऐसे ही एक परिपक्व इंसान का परिचय करवाती यह पुस्तक अनेकों रूढ़ियों को बदलने, समाज की वास्तविकताओं से परिचय करवाती है।
सबको ओर विशेष कर zen Z को तो जरूर यह पुस्तक पढ़नी चाहिए।
यह एक समाज को जानने का मार्ग है ये हमे सिखाती है की समाज मे जाती धर्म लिग के आधार पर भेदभाव ना करना और दुनिया की हर तरह की दुनिया का नजरिये से वाजिब करवाते है समाज और सार्वजनिक जगह पर नियमो और कर्तव्यका पालन करना सिखाती है । समाज मे फैल रही कुरूतियो का परित्याग करना समाज को सिविक सेंस एक नई दिशा देती है इस बुक का शीर्षक जब विचार सो जाते तब परम्पराए शासन करती है और विचार के लिए मन मे सवाल खङे करते है सोच पर मजबूर करती है अच्छी बुक है उम्मीद है समाज मे एक नई दिशा नई सोच नई विचारधारा लाएगी
Sawal puchna kitna jruri h …
Ye book pdhne k bad smjh aaya
Sawal puchne ki ek aadt or uske sahi jvab mil jana ..smaj m parivartan la skta h ..ek din m nhi lekin ek din jarur ….
Jb prashn jivit rahte hai,tbhi vichar jivit rahte hai…😊😊
Thank you so much bhai…
After reading the book, my mind and heart were filled with questions. Each chapter generated new thoughts and questions. Each line compelled me to think. “Why?” felt like the word had been planted in my brain. After reading it, I felt a sense of “why?” This book wasn’t a book of words, sentences, and chapters; it was a philosophy. Each chapter offered a new lesson. Wisdom, consciousness, and curiosity aren’t just characters in this book; they’re a philosophy that every person should possess. The chapters of this book are complete, but the thoughts and questions that arose during and after reading it continue unabated. Before undertaking any action, one must abandon the notion of “mine” and cultivate a sense of “ours.” The chapters of this book have ended, but the thoughts haven’t. After reading the book, I will strive to bring positivity into my thoughts. 🙏
Thanks Bro 👍
: समाज और सार्वजनिक स्थानों (Public Places) के प्रति अपने कर्तव्यों व जिम्मेदारियों को समझना। यह किसी कानून के डर से नहीं, बल्कि खुद की जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना से आता है, एवं जिसको समझाने में एक सार्थक किताब — “सिविक सेंस”।
यह सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि समकालीन भारतीय समाज का आईना है। उपन्यास 20वीं और 21वीं सदी की पीढ़ियों के बीच बढ़ते वैचारिक अंतर को बेहद सहजता से सामने रखता है। जाति के कारण टूटते रिश्तों और आत्महत्याओं की घटनाओं के बीच विवेक और चेतना का अंतरजातीय विवाह यह दिखाता है कि संवाद और समझदारी से परंपराओं की दीवारें भी टूट सकती हैं।
लेखक ने जातिवाद, सामाजिक प्रथाओं, परंपराओं और रूढ़ियों को विवेक, चेतना और जिज्ञासा जैसे पात्रों के माध्यम से तार्किक दृष्टि से प्रस्तुत किया है।
“महिलाएँ पैदा नहीं होतीं, बल्कि बनाई जाती हैं।”
“जाति है, जो जाती ही नहीं है न जाने! इस जाति के कारण कितनी ही प्रेम कहानियाँ और ज़िंदगियाँ अधूरी रह गईं।”
इस पुस्तक को पढ़कर महसूस होता है कि जब मनुष्य सोचना बंद कर देता है, तो परंपराएँ शासन करने लगती हैं और जब विवेक जागता है, तो रूढ़ियाँ सवालों के कटघरे में खड़ी हो जाती हैं। मेरा मानना है यह पुस्तक विशेष रूप से महिलाओं, लड़कियों, 11वीं–12वीं और कॉलेज विद्यार्थियों को अवश्य पढ़नी चाहिए।
आज के gen -z के लिए और उनके माता पिता के लिए ये बुक महत्वपूर्ण हैं वो एक बार अवश्य पढ़े और बुक में लिखी मूल बातों ओर लेखक महोदय के विचारों को समझे ।
किस तरह एक महिला को समाज द्वारा महिला बनने के लिए मजबूर किया जाता हैं। किस तरह हमारे समाज का सिविक सेंस सो जाता हैं। किस तरह परंपराएं हम पर राज करने लगती है।
आज हम दिन ब दिन अनेक घटनाएं देखते हैं जो नहीं होनी चाहिए थी फिर भी वो होती हैं तो वो क्यों होती उस समय उन में ये सिविक सेंस क्यों नहीं होता है । इस बुक में लेखक महोदय ने इन विचारों को एक पिता ओर बेटी के संवाद के रूप में समझाया है । इस किताब को पढ़कर आपके बहुत सारे विचार ओर गलत धारणाएं बदले गी।
मैने बुक को पूरा पढ़ा है मुझे अच्छी लगी आप भी जरूर पढ़े
धन्यवाद लेखक महोदय।
अक्सर हमारे परिवार और समाज में हमें दूसरों की इच्छा, असहमति और उनके अपने फैसलों का सम्मान करना नहीं सिखाया जाता। हम बहुत-सी बातें परंपरा के नाम पर स्वीकार करते जाते हैं, बिना यह सोचे कि सामने वाले की अपनी इच्छा क्या है।
‘सिविक सेंस’ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि यह किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि हर घर में होने और पढ़े जाने लायक है।
इस बार रक्षाबंधन पर मैं अपने भाई को राखी के साथ ‘सिविक सेंस’ भी गिफ्ट करूंगी। मुझे लगता है कि भाई को इससे बेहतर कोई ऐसा तोहफ़ा नहीं हो सकता, जो उसे कुछ नया सोचने के लिए मजबूर करे।
किताब पढ़ते-पढ़ते मेरे मन में एक और बात आई—अगर हर घर में विवेक जैसा पिता, चेतना जैसी पत्नी और जिज्ञासा जैसी बेटी हो, तो परिवार कितना सुंदर और संवादपूर्ण हो सकता है। ऐसा परिवार जहाँ सवाल पूछने की आज़ादी हो, असहमति को जगह मिले और एक-दूसरे की इच्छाओं और विचारों का सम्मान किया जाए।
मुझे इस किताब की सबसे अच्छी बात यही लगी कि यह हमें समाज की बड़ी-बड़ी समस्याओं पर भाषण नहीं देती, बल्कि घर और हमारे रोज़मर्रा के व्यवहार से सवाल करना शुरू करती है। लेखक गोविंद जाणी जी का धन्यवाद, हमें समाज की उन सच्चाइयों से रूबरू करवाने के लिए जिन्हें हम अक्सर देखते तो हैं, लेकिन उनके बारे में सोचते नहीं।
‘सिविक सेंस’ सिर्फ समाज को बदलने की बात नहीं करती, पहले हमें खुद से सवाल करना सिखाती है।
सिर्फ़ एक किताब नहीं, समाज को देखने का एक नया नज़रिया…
भेदभाव, जातिवाद, गरीबी, नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक स्थानों के प्रति सम्मान जैसे मुद्दों को समझाती एक सार्थक किताब — “सिविक सेंस”।
इस किताब ने बहुत कुछ सोचने पर मजबूर किया।
विवेक का अर्थ है जानना और जानने की पहली शर्त है यह मानना कि अभी और जानना बाकी है।
कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनका जवाब आसान नहीं होता,
और जो आसान है, वह हमेशा सच हो — यह ज़रूरी नहीं।
“Survivorship Bias” —
जो सफल हुआ, उसकी कहानी दिखाई देती हैं;
जो सफल नहीं हुए, वे अक्सर अंधेरे में रह जाते हैं।
शायद किताबें हमें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं,
बल्कि हमारी सोच को थोड़ा और बेहतर बनाने का मौका देती हैं। ✨
नया विचार नया समाज दिखावे से वास्तविक जीवन की ओर घुटन भरी जिंदगी से बार निकालने का अति उतम प्रयास
Good 👍