साध्वी प्रेम बाईसा Death Case: इंजेक्शन के 5 मिनट बाद हुई मौत, 18 दिन की जांच में पुलिस के हाथ क्या लगा?

साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला: इंजेक्शन, सुसाइड नोट और 18 दिन की जांच — क्या मिला पुलिस को?

राजस्थान, जोधपुर की युवा कथावाचक की संदिग्ध मौत ने जन्म दिया कई अनुत्तरित सवालों को; FSL रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मौत का कारण स्पष्ट किया, लेकिन जांच अभी भी जारी है

भूमिका

राजस्थान के जोधपुर में 28 जनवरी 2026 की शाम एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। महज 25 वर्षीया युवा कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा, जिनके प्रवचनों में हजारों श्रद्धालु खिंचे चले आते थे उनकी अचानक और संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। इंस्टाग्राम पर 7 लाख से अधिक फॉलोअर्स रखने वाली इस साध्वी की मृत्यु के बाद उनके अकाउंट से पोस्ट हुआ एक ‘सुसाइड नोट’, वर्षों पुराना एक वायरल वीडियो विवाद और इंजेक्शन का रहस्य — इन सबने मिलकर एक ऐसा मामला खड़ा किया जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहीं। पश्चिमी राजस्थान में कथा वाचन के लिए प्रसिद्ध प्रेम बाईसा, महंत वीरमनाथ की शिष्या और पुत्री थीं।

घटना की टाइमलाइन

8 जनवरी 2021: जोधपुर के साधना कुटीर आश्रम में एक निजी वीडियो रिकॉर्ड हुआ, जो बाद में इस पूरे मामले की जड़ बना।

29 जुलाई 2022: साध्वी प्रेम बाईसा ने स्वयं एफआईआर दर्ज करवाई। आरोप था कि वीडियो वायरल करने से पहले 20 लाख रुपये की मांग की गई और मना करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर डाला गया। इस मामले में जोगेंद्र कुमार उर्फ जोगाराम के खिलाफ चालान पेश हुआ। 

13 जुलाई 2025: वही पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल हुआ। साध्वी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखने वाले व्यक्ति उनके पिता और गुरु महंत वीरमनाथ हैं।

16 जुलाई 2025:धारा 384 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत बोरानाडा थाने में नया मामला दर्ज हुआ और चालान प्रक्रिया भी पूरी की गई। 

26–27 जनवरी 2026: साध्वी के पिता के मुताबिक, उन्हें सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत थी — वह पिछले दो दिनों से अस्वस्थ थीं।

28 जनवरी 2026 (शाम):साधना कुटीर आश्रम में साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ी। आश्रम के एक युवक के अनुसार, इंजेक्शन लगने के लगभग पाँच मिनट बाद वह चीखते हुए कमरे से बाहर निकलीं। उन्हें तत्काल जोधपुर के प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

28 जनवरी 2026 (मृत्यु के लगभग तीन घंटे बाद):साध्वी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट अपलोड हुई। साध्वी के पिता वीरमनाथ ने बाद में स्वीकार किया कि यह पोस्ट उन्होंने गाड़ी में बैठकर अपने ड्राइवर से करवाई थी। 

14 फरवरी 2026:जोधपुर पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश पासवान ने आधिकारिक प्रेस वार्ता में FSL और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारण की घोषणा की। 

पुलिस का आधिकारिक बयान

जोधपुर पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश पासवान ने बताया कि साध्वी की मौत **कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट** से हुई। FSL और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट से साफ हो गया है कि मौत किसी जहर या अन्य बाहरी कारण से नहीं हुई। 

कमिश्नर ने बताया कि कंपाउंडर देवी सिंह खुद इंजेक्शन लेकर आया था, लेकिन अभी तक उस इंजेक्शन से जुड़ी कोई पर्ची नहीं मिली है। एक्सपर्ट रिपोर्ट आने के बाद यदि लापरवाही सामने आती है तो बीएनएस और चिकित्सकीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सभी विकल्प रिपोर्ट के आधार पर खुले हैं। 

पूछताछ में कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित ने दावा किया था कि उसने पर्ची देखी थी और उसके आधार पर ही इंजेक्शन लगाया था। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पर्ची किस डॉक्टर की थी, जिसके चलते उससे दोबारा पूछताछ की प्रक्रिया चली।

पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट

पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए विसरा के नमूने राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी, जयपुर भेजे। रिपोर्ट 16वें दिन सामने आई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से निष्कर्ष की ओर ले जाया। 

मेडिकल बोर्ड की विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, आंतरिक अंगों के विश्लेषण के आधार पर मौत का कारण हृदय गति रुकना था। अभी तक जहर या किसी अन्य ऐसे पदार्थ का पता नहीं चला जिससे किसी साजिश का संकेत मिले। 

पुलिस ने साध्वी की मेडिकल हिस्ट्री का अलग से विश्लेषण किया — वह कब से बीमार थीं, कौन सी दवाएँ लेती थीं। इस क्रम में ड्रग कंट्रोलर, CMHO, और राजस्थान नर्सिंग काउंसिल समेत कई इकाइयों से जानकारी ली गई। 

जाँच की वर्तमान स्थिति

*मामला जांचाधीन है।

पुलिस ने 28 जनवरी की पूरी टाइमलाइन को दोबारा जांचा — तबीयत बिगड़ने से लेकर इंजेक्शन लगने और प्रेक्षा अस्पताल ले जाने तक। CCTV और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का भी विश्लेषण हुआ। 

आश्रम में CCTV हटाने को लेकर भी सवाल उठे। भक्तों का कहना था कि पहले आश्रम में CCTV कैमरे लगे थे, लेकिन घटना के समय कैमरे मौजूद नहीं थे। 

मामले में सोशल मीडिया एंगल भी जांच के घेरे में रहा। पुलिस यह पता लगाती रही कि साध्वी के कितने सोशल मीडिया अकाउंट थे और क्या उन्हें डिजिटल माध्यम से किसी तरह परेशान किया जा रहा था। संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने की संभावना पर भी विचार हुआ। 

कोर्ट कार्यवाही

वायरल वीडियो से जुड़े पुराने मामले में जोगेंद्र कुमार उर्फ जोगाराम के खिलाफ चालान पेश हो चुका है और उसे अदालत से जमानत मिल चुकी है। 

28 जनवरी 2026 की मृत्यु संबंधी मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और न ही कोई आरोप पत्र दाखिल हुआ है। FSL रिपोर्ट और चिकित्सा विशेषज्ञों की अंतिम राय के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित होगी।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया

साध्वी के पिता वीरमनाथ बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए न्याय की मांग करते रहे।

पिता का कहना है कि इंस्टाग्राम पोस्ट उन्होंने गाड़ी में बैठकर अपने ड्राइवर से करवाया था। 

पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा और साध्वी को उनके पैतृक गाँव में समाधि दी गई। उनके लाखों अनुयायी और सोशल मीडिया फॉलोअर्स लगातार न्याय की माँग में मुखर रहे।

कानूनी विशेषज्ञों का सामान्य विश्लेषण

इस प्रकार के मामलों में सामान्यतः यह स्थापित कानूनी सिद्धांत लागू होते हैं: यदि बिना उचित पर्ची के या अनुचित इंजेक्शन से मौत प्रमाणित हो, तो BNS की धारा 106 (गैर इरादतन हत्या) और राजस्थान चिकित्सा अधिनियम के प्रावधान लागू हो सकते हैं। मृत्यु के बाद मृतक के सोशल मीडिया का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग — परिजन हों या कोई और — एक कानूनी प्रश्न है जो IT Act के तहत जांच का विषय बन सकता है। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम और FSL जांच, संदिग्ध मौत के मामलों में मानक प्रक्रिया है और न्यायिक प्रक्रिया में इसे सर्वाधिक विश्वसनीय साक्ष्य माना जाता है।

मौत कैसे हुई?

जोधपुर पुलिस की 18 दिन की गहन जाँच के बाद FSL और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि साध्वी प्रेम बाईसा की मृत्यु **कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट** से हुई और किसी विषाक्त पदार्थ या बाहरी षड्यंत्र का कोई प्रमाण नहीं मिला। किंतु इंजेक्शन देने में संभावित **चिकित्सकीय लापरवाही** के प्रश्न पर जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई के सभी विकल्प खुले हैं।

यह मामला केवल एक मृत्यु की जांच नहीं है — इसमें डिजिटल उत्पीड़न, सोशल मीडिया ब्लैकमेल और एक युवा धार्मिक प्रचारक पर लगातार बने रहे सामाजिक दबाव की परतें भी जुड़ी हैं, जिन पर आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में विचार होगा।

**मामला जांचाधीन है।**

यह आर्टिकल पूर्णतः आधिकारिक स्रोतों — जोधपुर पुलिस आयुक्त के बयान, मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट और FSL निष्कर्ष — के आधार पर तैयार किया गया है। किसी अपुष्ट दावे को इसमें सम्मिलित नहीं किया गया है।

 साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला

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“यह रिपोर्ट आधिकारिक पुलिस बयानों और रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम फैसला न्यायालय के अधीन है।

अभी क्या सवाल बाकी हैं?

1. **इंजेक्शन की पर्ची** — वह डॉक्टर कौन था? क्या ऐसी पर्ची वास्तव में अस्तित्व में थी?

2. **CCTV कैमरे क्यों और कब हटाए गए?** — इसका कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी तक नहीं है।

3. **मृत्यु के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट की कानूनी स्थिति** — यह किसकी जिम्मेदारी थी?

4. **चिकित्सकीय लापरवाही पर एक्सपर्ट की अंतिम राय** — अभी लंबित है।

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5. **वायरल वीडियो, ब्लैकमेलिंग और मानसिक दबाव का मौत से संबंध** — क्या यह पहलू भी जांच का हिस्सा बनेगा?

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