मेडीपल्स अस्पताल जोधपुर विवाद: आधी रात को बाहर धरना, अंदर CCTV में कैद ‘थप्पड़ कांड’ का दृश्य। (क्रेडिट: X)
जोधपुर के Medipulse Hospital में किसान की मौत के बाद बवाल, समझौते के बाद उठा शव
बिश्नोई समाज का धरना, अस्पताल प्रबंधन ने मांगी माफी; मुआवजे को लेकर बनी सहमति
राजस्थान के जोधपुर स्थित निजी अस्पताल Medipulse Hospital में एक किसान की मौत के बाद रविवार देर रात बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इलाज के दौरान मौत के बाद अस्पताल और परिजनों के बीच बिल को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला धरने-प्रदर्शन और सामाजिक हस्तक्षेप तक पहुंच गया। कई घंटों तक चले तनाव के बाद आखिरकार देर शाम दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
इस घटना ने पूरे जोधपुर में चर्चा पैदा कर दी और सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो गया।
किसान की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती–
मिली जानकारी के अनुसार भोजाकोर गांव निवासी किसान सुखराम विश्नोई (70) की अचानक तबीयत खराब हो गई। परिवारजन उन्हें इलाज के लिए जोधपुर के Medipulse Hospital लेकर पहुंचे।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनका इलाज शुरू किया गया, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
परिवार के सदस्यों के अनुसार उन्होंने अस्पताल में 12 हजार रुपये जमा कराए थे और बाकी राशि सरकारी योजना के तहत समायोजित कराने की बात चल रही थी।
बिल को लेकर विवाद, शव देने से इनकार का आरोप
परिवारजनों का आरोप है कि इलाज के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे करीब एक लाख रुपये का बिल बताया।
परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने पूरी राशि तुरंत देने में असमर्थता जताई और सरकारी योजना का हवाला दिया, तो अस्पताल की ओर से मृतक का शव देने से मना कर दिया गया।
हालांकि अस्पताल की ओर से इस मामले पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस आरोप के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
समाज के नेता को दी सूचना
घटना के बाद परिजनों ने अखिल भारतीय विश्नोई महासभा के अध्यक्ष Devendra Kumar Budiya को मामले की जानकारी दी।
सूचना मिलने के बाद देर रात देवेंद्र बूड़िया अपने एक साथी के साथ अस्पताल पहुंचे और अस्पताल स्टाफ से बातचीत की।
परिजनों और समाज के लोगों का कहना है कि बातचीत के दौरान बिल और शव सौंपने को लेकर विवाद बढ़ गया।
CCTV में कैद हुआ थप्पड़ कांड
बताया जा रहा है कि इसी दौरान बहस के बीच देवेंद्र बूड़िया ने अस्पताल के एक कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया।
यह पूरी घटना अस्पताल के CCTV कैमरों में कैद हो गई।
घटना के बाद माहौल और ज्यादा गर्म हो गया।
अस्पताल स्टाफ पर मारपीट का आरोप
परिजनों और समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि जब देवेंद्र बूड़िया और उनका साथी अस्पताल से बाहर निकलकर अपनी गाड़ी में बैठकर जाने लगे, तब अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट कर दी।
इसके बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया और देवेंद्र बूड़िया वहीं अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए।
सोशल मीडिया से जुटी भीड़–
धरने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से बिश्नोई समाज के लोगों को घटना की जानकारी दी गई।
रात से शुरू हुआ यह मामला सुबह तक बड़ा रूप ले गया और सैकड़ों लोग अस्पताल परिसर में इकट्ठा हो गए।
लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की और प्रशासन से हस्तक्षेप करने की अपील की।
पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे–
स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई और माहौल को शांत कराने की कोशिश की।
प्रशासन ने दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद सुलझाने का प्रयास किया।
करीब पूरे दिन चली बातचीत और समझाइश के बाद शाम को आखिरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।
अस्पताल मालिक ने मांगी माफी–
सूत्रों के अनुसार समझौते के दौरान अस्पताल के मालिक मयंक सिंघी ने समाज के लोगों के सामने अपनी पगड़ी उतारकर माफी मांगी।
बताया जा रहा है कि उन्होंने विश्नोई समाज के प्रतिनिधियों से हाथ जोड़कर मामले को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने की अपील की।
मुआवजे पर बनी सहमति–
सूत्रों के अनुसार समझौते में आर्थिक सहायता को लेकर भी सहमति बनी।
बताया जा रहा है कि
20 लाख रुपये मृतक किसान के परिवार को
80 लाख रुपये गौशाला को देने की बात कही गई।
हालांकि इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इसी सहमति के बाद शव को उठाया गया।
समझौते के बाद शव सौंपा गया–
दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मृतक किसान का शव परिवार को सौंप दिया।
इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने गांव लेकर रवाना हो गए।
अस्पताल की पृष्ठभूमि–
जोधपुर का Medipulse Hospital एक निजी मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल है, जहां कई विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं और कई विभागों में इलाज की सुविधा दी जाती है।
प्रशासन से जांच की मांग
घटना के बाद बिश्नोई समाज के लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है और कहा है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
दुष्कर्म आरोपों के बीच देवेंद्र बूड़िया को लेकर विवाद, बिश्नोई समाज में नेतृत्व पर उठे सवाल
बिश्नोई समाज से जुड़े एक बड़े विवाद ने सोशल मीडिया और समुदाय के भीतर बहस को जन्म दे दिया है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष Devendra Boodiya पर लगे दुष्कर्म के आरोप और उनके नेतृत्व को लेकर समाज के भीतर मतभेद सामने आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के अनुसार, हरियाणा के हिसार जिले के Adampur थाना क्षेत्र में 24 जनवरी 2025 को एक 20 वर्षीय युवती ने देवेंद्र बूड़िया पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता के बयान के मुताबिक, उसे विदेश भेजने, अभिनेता Salman Khan से मिलवाने और टीवी शो Bigg Boss में एंट्री दिलाने का लालच देकर कथित रूप से उसका शोषण किया गया।
आरोप और जांच की स्थिति–
मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल पोस्ट्स के अनुसार, शिकायत में कहा गया कि युवती के साथ कथित रूप से Chandigarh के एक होटल और Jaipur स्थित एक फ्लैट में कई बार शारीरिक शोषण किया गया।
बताया जाता है कि मामले की जांच के दौरान पुलिस ने करीब 1912 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 45 गवाहों के बयान, कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जैसे साक्ष्य शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2025 में देवेंद्र बूड़िया को Jodhpur से गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने लगभग तीन महीने जेल में बिताए। बाद में अक्टूबर 2025 में हिसार की फास्ट ट्रैक अदालत से उन्हें नियमित जमानत मिल गई।
सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने जमानत देते समय उम्र, स्वास्थ्य और जांच पूरी होने जैसे पहलुओं को आधार माना। वहीं यह मामला फिलहाल सेशन कोर्ट में लंबित बताया जा रहा है और ट्रायल जारी है।
बिश्नोई समाज में नेतृत्व को लेकर विवाद–
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिश्नोई समाज के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ लोग देवेंद्र बूड़िया को “राजनीतिक साजिश का शिकार” बता रहे हैं, जबकि समाज का एक वर्ग ऐसे आरोपों के बीच किसी भी व्यक्ति को नेतृत्व पद देने पर सवाल उठा रहा है।
बिश्नोई समुदाय की आध्यात्मिक परंपरा Guru Jambheshwar (गुरु जांभोजी) की शिक्षाओं पर आधारित है, जिसमें प्रकृति संरक्षण, जीव-रक्षा और नैतिक जीवन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण समाज में इस मामले को लेकर नैतिकता और नेतृत्व की जिम्मेदारी पर बहस तेज हो गई है।
समाज में दो धड़े
समाज के भीतर इस मुद्दे पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:
एक पक्ष इसे राजनीतिक साजिश बताकर देवेंद्र बूड़िया का समर्थन कर रहा है।
दूसरा पक्ष कह रहा है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को किसी सामाजिक संगठन का नेतृत्व नहीं करना चाहिए।
अभी अदालत में विचाराधीन मामला–
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। ऐसे मामलों में आरोप सिद्ध होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाता।
डिस्क्लेमर–
NationalPeopleVoice.com इस खबर में शामिल कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल दावों के आधार पर संकलित की गई है। मामले की सच्चाई का अंतिम निर्णय अदालत द्वारा किया जाएगा।
