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चंद्र ग्रहण, भद्रा काल और तिथि विवाद — पूरी जानकारी एक जगह
| होलाष्टक प्रारंभ | होलिका दहन | रंगवाली होली | सरकारी छुट्टी |
| 23 फ़रवरी 2026 | 3 मार्च 2026 (मंगलवार) | 4 मार्च 2026 (बुधवार) | 3 व 4 मार्च 2026 |
1. होली 2026 — मुख्य तिथियाँ और अवलोकन
रंगों का महापर्व होली इस वर्ष 2026 में असामान्य खगोलीय योगों के बीच मनाया जाएगा। एक तरफ भद्रा काल और दूसरी तरफ चंद्र ग्रहण ने होली और होलिका दहन की सही तारीख को लेकर पूरे देश में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी है। ज्योतिषाचार्यों और पंचांगों में भी मतभेद देखा गया है, हालाँकि अधिकांश विद्वानों का निष्कर्ष है कि:
- होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार), शाम 6:22 से रात 8:00 बजे तक
- रंगवाली होली: 4 मार्च 2026 (बुधवार)
- फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा: 2 मार्च शाम 5:55 से 3 मार्च शाम 4:40/5:08 तक
- चंद्र ग्रहण: 3 मार्च 2026, दोपहर 3:21 से शाम 6:46 बजे तक
2. होली की तिथियों में गड़बड़ी कैसे?
इस वर्ष होली की तारीख को लेकर भ्रम की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
2.1 भद्रा काल का संकट
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन के लिए तीन शर्तें अनिवार्य हैं — प्रदोष काल, पूर्णिमा तिथि और भद्रा रहित समय। इस वर्ष 2 मार्च की शाम 5:55 बजे फाल्गुन पूर्णिमा प्रारंभ होती है, लेकिन ठीक उसी समय भद्रा काल भी आरंभ हो जाती है। भद्रा की पूंछ 3 मार्च सुबह लगभग 5:32 बजे तक रहती है।
धर्म सिंधु ग्रंथ स्पष्ट रूप से कहता है कि भद्रा काल में होलिका दहन करना व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए अशुभ होता है। इसलिए 2 मार्च की शाम को होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत नहीं माना जा रहा।
2.2 चंद्र ग्रहण का प्रभाव
3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण भारत में भी दृश्यमान होगा — खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में। इसके कारण सूतक काल सुबह 6:20 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा।
सूतक काल में किसी भी शुभ कार्य की मनाही होती है। इसीलिए 3 मार्च को रंगों की होली खेलना उचित नहीं माना जा रहा है। ग्रहण भारत के पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र में भी दिखाई देगा।
2.3 पूर्णिमा तिथि का अभाव
3 मार्च को भले ही भद्रा नहीं है, लेकिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि उपलब्ध नहीं है — क्योंकि पूर्णिमा शाम 4:40/5:08 बजे तक ही रहेगी। यह द्वंद्व ही इस वर्ष की सबसे बड़ी ज्योतिषीय पहेली बन गया है।
3. पंडितों का क्या कहना है?
देश के प्रमुख ज्योतिषाचार्यों ने अपने-अपने तर्कों के साथ होलिका दहन और होली की सही तिथि बताई है:
| पंडित/ज्योतिषाचार्य | होलिका दहन की राय | रंगवाली होली की राय |
| पं. मनोज त्रिपाठी (हरिद्वार) | 3 मार्च, शाम 6:24 से रात 8:00 बजे तक | 4 मार्च 2026 |
| पं. दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री | 2-3 मार्च की दरमियानी रात | 4 मार्च 2026 |
| पं. वेद प्रकाश मिश्रा | 2 मार्च रात (भद्रा पूंछ में) | 4 मार्च 2026 |
| पं. अरुणेश कुमार शर्मा | 3 मार्च, अर्धरात्रि में | 4 मार्च 2026 |
| पं. प्रवीण मिश्र | 2 मार्च, शाम 6:22 से रात 8:53 बजे | 4 मार्च 2026 |
| पं. सुरेश पांडेय | 3 मार्च, सुबह 4:56 से 5:45 तक | 4 मार्च 2026 |
निष्कर्ष: सभी प्रमुख पंडितों और पंचांगों की सर्वसम्मत राय है कि रंगवाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाए।
4. ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है?
ज्योतिष शास्त्र और प्रमुख ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन के लिए निम्नलिखित योग होने चाहिए:
- प्रदोष काल व्यापिनी पूर्णिमा तिथि (सूर्यास्त के बाद का समय)
- भद्रा रहित काल — भद्रा में दहन करना देश-समाज के लिए अशुभ माना गया है (धर्म सिंधु)
- चंद्र उदय के समय ग्रहण-मुक्त आकाश
इस वर्ष की विशेष खगोलीय स्थिति:
- पंचग्रही योग: 3 मार्च को मंगल, बुध, शनि, राहु और केतु का दुर्लभ संयोग
- चंद्र ग्रहण ‘गृहस्तोदय’ स्थिति में — यानी चंद्रोदय के समय ग्रहण लगभग समाप्त
- ग्रहण केवल पूर्वोत्तर भारत में आंशिक रूप से दृश्यमान
- भद्रा पूंछ काल: 2-3 मार्च की मध्यरात्रि 12:50 से 2:02 बजे — इसमें दहन स्वीकार्य
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि भद्रा के मुख में दहन करने से राष्ट्र पर संकट आता है, इसलिए भद्रा पूंछ या उसके बाद का समय ही उचित है।
5. सरकार ने होली की छुट्टी कब घोषित की?
भारत सरकार (केंद्र सरकार) की राजपत्रित छुट्टियों (Gazetted Holidays) के अनुसार:
- 3 मार्च 2026 (मंगलवार) — होलिका दहन (Holi) — राजपत्रित अवकाश
- 4 मार्च 2026 (बुधवार) — रंगवाली होली — कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश
राज्यवार स्थिति:
| राज्य | होलिका दहन छुट्टी | होली छुट्टी |
| उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश | 3 मार्च 2026 | 4 मार्च 2026 |
| राजस्थान, हरियाणा, पंजाब | 3 मार्च 2026 | 4 मार्च 2026 |
| गुजरात, महाराष्ट्र | 3 मार्च 2026 | 4 मार्च (धुलेटी) |
| पश्चिम बंगाल, ओडिशा | 3 मार्च 2026 | 4 मार्च (दोल जात्रा) |
| केंद्र सरकार के कार्यालय | 3 मार्च (Gazetted) | राज्य नीति अनुसार |
नोट: बैंक 3 और 4 मार्च दोनों दिन बंद रहेंगे — RBI के अवकाश कैलेंडर के अनुसार।
6. होली का इतिहास और पौराणिक महत्व
6.1 पुराणों में होली की कथा
होली का सबसे प्रचलित पौराणिक आधार भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा है। हिरण्यकश्यप एक अहंकारी राक्षस राजा था जो भगवान विष्णु का घोर विरोधी था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका — जिसे आग में न जलने का वरदान था — को प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का आदेश दिया।
भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहा और होलिका जल गई। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है — बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में।
6.2 राधा-कृष्ण की होली
ब्रज क्षेत्र (मथुरा-वृंदावन) में होली का विशेष महत्व है। यह त्योहार श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम लीलाओं से जुड़ा है। कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंग खेलकर इस परंपरा को आरंभ किया था। ब्रज की लठमार होली, लड्डू होली और फूलों की होली विश्व प्रसिद्ध है।
6.3 शिव-पार्वती और कामदेव की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया था, जिस पर शिव ने उन्हें भस्म कर दिया। बाद में पार्वती के अनुरोध पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित किया और यह दिन होली के रूप में मनाया जाने लगा।
6.4 ऐतिहासिक उल्लेख
होली का उल्लेख नारद पुराण, भविष्य पुराण और जैमिनी के ‘पूर्व मीमांसा सूत्र’ में मिलता है। इसके अलावा 7वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक ‘रत्नावली’ में भी होली का जिक्र है। प्राचीन विजयनगर साम्राज्य के अभिलेखों में भी ‘वसंतोत्सव’ के रूप में इसका वर्णन मिलता है।
6.5 वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व
होली वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है। होलिका दहन की राख खेतों में डालने की परंपरा थी — इससे फसल अच्छी होती थी। रंग खेलना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह त्योहार सामाजिक समरसता, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक है।
7. सभी प्रमुख अपडेट्स — एक नजर में
चंद्र ग्रहण 2026:
- 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (Blood Moon)
- समय: दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक
- सूतक काल: 3 मार्च सुबह 6:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक
- दृश्यमान: भारत, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, अमेरिका
होलाष्टक:
- 23 फ़रवरी 2026 से होलाष्टक प्रारंभ
- इन 8 दिनों में कोई शुभ कार्य न करने की मान्यता है
पंचग्रही योग:
- 3 मार्च 2026 को दुर्लभ पंचग्रही योग — मंगल, बुध, शनि, राहु, केतु का संयोग
- ज्योतिषाचार्यों ने इसे विशेष सावधानी का समय बताया
शुभ मुहूर्त (सर्वमान्य):
- होलिका दहन: 3 मार्च 2026, शाम 6:22 से रात 8:00/8:50 बजे तक
- वैकल्पिक: 2-3 मार्च की रात 12:50 से 2:02 बजे (भद्रा पूंछ में)
- रंगवाली होली: 4 मार्च 2026, सुबह से
8. निष्कर्ष
2026 की होली ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष है। भद्रा काल, चंद्र ग्रहण और पंचग्रही योग ने इस वर्ष की तिथियों को जटिल बना दिया है। लेकिन देशभर के पंडितों और ज्योतिषाचार्यों की सर्वसम्मत राय स्पष्ट है:
| 🔥 होलिका दहन — 3 मार्च 2026 | 🌈 रंगवाली होली — 4 मार्च 2026 |
होली के इस पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ! रंगों का यह त्योहार आपके जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और नई उम्मीदें लेकर आए।
“यह जानकारी विभिन्न पंचांगों एवं मीडिया रिपोर्ट्स के विश्लेषण पर आधारित है।”
