हरदीप सिंह पुरी जी(फाइल फोटो) – FB
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री की बेटी हिमायनी पुरी ने कथित रूप से सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही “भ्रामक और झूठी सामग्री” के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर कर उन सभी रिपोर्टों, पोस्ट्स, वीडियो और डिजिटल कंटेंट को हटाने की मांग की है, जिनमें उनका नाम अमेरिकी यौन अपराधी से जोड़ा गया है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) की बेटी हिमायनी पुरी ने जेफ्री एपस्टीन के मामले से उन्हें जोड़ने वाली कथित भ्रामक पोस्ट्स को हटाने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।
क्या है पूरा मामला
याचिका में हिमायनी पुरी ने आरोप लगाया है कि इंटरनेट पर प्रसारित कई पोस्ट्स में बिना किसी तथ्यात्मक आधार के उन्हें एपस्टीन या उसकी कथित आपराधिक गतिविधियों के वित्तीय या नेटवर्क संबंधों से जोड़ने की कोशिश की गई।
उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री से उनकी प्रतिष्ठा, पेशेवर जीवन और निजी सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसलिए उन्होंने कोर्ट से ऐसे सभी कंटेंट को हटाने और आगे प्रसार रोकने के निर्देश देने की मांग की है।
एपस्टीन फाइल क्या है?
“एपस्टीन फाइल” या “Epstein Files” से तात्पर्य उन दस्तावेज़ों, कोर्ट रिकॉर्ड, संपर्क सूची, ईमेल, यात्रा रिकॉर्ड और गवाही से है जो से जुड़े मामलों की जांच के दौरान सामने आए थे।
इन फाइलों में कई प्रभावशाली बिजनेसमैन, राजनेताओं, सेलिब्रिटीज और अन्य हाई-प्रोफाइल लोगों के नाम विभिन्न संदर्भों में सामने आए थे।
👉 महत्वपूर्ण बात:
- किसी भी “लिस्ट” या “फाइल” में नाम आने का अर्थ आपराधिक संलिप्तता साबित होना नहीं होता।
- कई नाम केवल संपर्क, यात्रा या सामाजिक परिचय के कारण भी रिकॉर्ड में दर्ज हुए थे।
- जांच एजेंसियां और अदालतें ही तय करती हैं कि किसके खिलाफ ठोस सबूत हैं या नहीं।
हरदीप पुरी का क्या है रोल?
अब तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार:
- केंद्रीय मंत्री का एपस्टीन मामले या उसकी आपराधिक गतिविधियों से कोई सिद्ध या आधिकारिक संबंध सामने नहीं आया है।
- हिमायनी पुरी की याचिका भी इसी बात पर जोर देती है कि ऑनलाइन फैल रही सामग्री झूठी और मानहानिकारक है।
- अदालत में मामला विचाराधीन है, इसलिए अंतिम स्थिति कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
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कोर्ट से क्या मांग
याचिका में मुख्य मांगें:
- कथित मानहानिकारक पोस्ट, वीडियो और रिपोर्ट्स को तुरंत हटाया जाए
- आगे ऐसे कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाई जाए
- प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपये का हर्जाना
डिजिटल युग में फेक लिंकिंग का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया के दौर में बिना सत्यापन के वायरल सामग्री किसी भी व्यक्ति की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए कोर्ट ऐसे मामलों में फैक्ट-चेक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर जोर देती रही हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह खबर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी और अदालत में दायर याचिका के आधार पर लिखी गई है। ‘National People Voice’ इस लेख में किए गए किसी भी दावे या आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह मामला वर्तमान में माननीय न्यायालय के विचाराधीन है और हमारा उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना पहुँचाना है, किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना नहीं।
