9 राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति: दिल्ली में संधू और बंगाल में RN रवि; देखें पूरी लिस्ट (2026)

राज्यपालों में ऐतिहासिक फेरबदल

केंद्र का ‘संवैधानिक सर्जिकल स्ट्राइक’ — 9 राज्यों में एक साथ बदले राज्यपाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 मार्च 2026 को देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के तहत तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली समेत कई अहम पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

📌 मुख्य बिंदु एक नज़र में

  • 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ राज्यपाल बदले गए
  • दिल्ली में कूटनीतिज्ञ तरनजीत सिंह संधू को उपराज्यपाल नियुक्त किया गया
  • पश्चिम बंगाल में आर.एन. रवि को नया राज्यपाल बनाया गया — ममता सरकार से सीधा टकराव संभव
  • बिहार में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन की नियुक्ति
  • पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार

🗺️ राज्यवार पूरी तस्वीर

कौन कहाँ गया? — पूरी सूची
राज्य / UTनए राज्यपाल / LGपहले कहाँ थे
दिल्ली (LG)तरनजीत सिंह संधूअमेरिका में भारत के राजदूत
बिहारले. जन. (रि.) सैयद अता हसनैनसेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी
पश्चिम बंगालआर.एन. रवितमिलनाडु के राज्यपाल
तेलंगानाशिव प्रताप शुक्लाहिमाचल प्रदेश के राज्यपाल
महाराष्ट्रजिष्णु देव वर्मातेलंगाना के राज्यपाल
हिमाचल प्रदेशकविंदर गुप्तालद्दाख के उपराज्यपाल
लद्दाखविनय कुमार सक्सेनादिल्ली के उपराज्यपाल
नागालैंडनंद किशोर यादवनई नियुक्ति
तमिलनाडु (प्रभार)राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकरकेरल के राज्यपाल

🔍 हर नियुक्ति की गहरी पड़ताल

दिल्ली — कूटनीतिज्ञ को मिली कमान

अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू अब दिल्ली के नए उपराज्यपाल होंगे। संधू की नियुक्ति केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश मानी जा रही है। वहीं, निवर्तमान एलजी विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख की रणनीतिक कमान सौंपी गई है।

संधू जैसे अनुभवी राजनयिक की नियुक्ति यह संकेत देती है कि केंद्र सरकार दिल्ली में प्रशासनिक टकराव की बजाय संवाद और समन्वय की राह अपनाना चाहती है।

बिहार — सेना का अनुशासन, राजभवन में

बिहार में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन की नियुक्ति को खास माना जा रहा है। वे अपनी सैन्य पृष्ठभूमि और उग्रवाद-विरोधी अभियानों के अनुभव के लिए जाने जाते हैं। बिहार जैसे जटिल राज्य में एक सैन्य पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल की नियुक्ति कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन के लिहाज से बड़ा संकेत है।

पश्चिम बंगाल — सबसे ‘हॉट सीट’ पर नई चुनौती

राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस का त्यागपत्र मंजूर कर लिया है। सी.वी. आनंद बोस नवंबर 2022 से इस पद पर कार्यरत थे।

पश्चिम बंगाल की चुनौतीपूर्ण राजनीति के बीच तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को वहां भेजा गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं। सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद रवि की वहां नियुक्ति केंद्र-राज्य संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।

📢 ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन कर जानकारी दी कि आर.एन. रवि को नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि इस तरह के फैसले सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर कर सकते हैं और इससे राज्यों की गरिमा पर असर पड़ता है।

इस फेरबदल के पीछे क्या है रणनीति?

केंद्र सरकार के इस कदम को कई कोणों से देखा जा रहा है —

चुनावी तैयारी

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव करीब हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल पद में बदलाव का राज्य की राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है।

प्रोफाइल का सटीक मेल

कूटनीतिज्ञ को दिल्ली, पूर्व सैन्य अधिकारी को बिहार, और कड़क प्रशासक को बंगाल — यह संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति दिखती है।

संघीय संतुलन

केंद्र सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को कई राज्यों में शासन व्यवस्था को मजबूत करने और विरोधी दलों की सरकारों पर नज़र रखने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

⚖️ संवैधानिक पक्ष — क्या कहता है कानून?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति के द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति की जाती है। राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है और राज्य में संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाता है। राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष होता है, लेकिन केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति उन्हें कभी भी हटा या स्थानांतरित कर सकते हैं।

🎯 निष्कर्ष
यह फेरबदल महज़ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का एक सुविचारित राजनीतिक-संवैधानिक कदम है। जहाँ एक ओर दिल्ली में कूटनीति को प्राथमिकता दी गई, वहीं बंगाल में ‘सख्ती’ और बिहार में ‘अनुशासन’ का संदेश साफ़ नज़र आता है। आने वाले महीनों में इन नियुक्तियों का असर राज्यों की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर गहरा पड़ सकता है।

📅 स्रोत: राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति  |  तारीख: 5-6 मार्च 2026

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