भारत में बैंकिंग सिस्टम और वित्तीय लेनदेन को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और आयकर विभाग ने हाल ही में कई बड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्राप्त जानकारी और नई गाइडलाइंस के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से बैंकिंग, लोन रिकवरी, डिजिटल फ्रॉड और टैक्स से जुड़े 7 नए नियम लागू होने वाले हैं। ‘National People Voice’ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि इन बदलावों का आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा।
डिजिटल फ्रॉड होने पर मिलेगा 85% तक रिफंड
बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए RBI ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। 1 जुलाई 2026 से, यदि किसी ग्राहक के साथ डिजिटल धोखाधड़ी होती है, तो उसे नुकसान का 85% तक रिफंड मिल सकेगा।
- नियम: 50,000 रुपये तक के फ्रॉड पर अधिकतम 25,000 रुपये का मुआवजा मिलेगा।
- जरूरी शर्त: पीड़ित को घटना के 5 दिनों के भीतर नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) या अपने बैंक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी होगी। 5 दिन बाद की गई शिकायत पर क्लेम नहीं मिलेगा। यह सुविधा ग्राहक को जीवन में केवल एक बार मिलेगी।
लोन रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर लगेगी रोक
लोन न चुका पाने की स्थिति में ग्राहकों को परेशान करने वाले रिकवरी एजेंटों पर अब नकेल कसी जाएगी।
- समय सीमा: बैंक या NBFC के रिकवरी एजेंट अब केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकते हैं।
- प्राइवेसी: एजेंट किसी भी ग्राहक के दोस्तों या रिश्तेदारों को कॉल करके लोन की जानकारी उजागर नहीं कर सकते। मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना साबित होने पर बैंक का रिकवरी लाइसेंस रद्द हो सकता है।
बेसिक सेविंग खातों (BSBD) से हटीं पाबंदियां
RBI ने जीरो बैलेंस (BSBD) खातों के नियमों में व्यापक संशोधन किए हैं, जिससे निम्न आय वर्ग के ग्राहकों को सीधा फायदा होगा।
- नई सुविधाएं: अब इन खातों में नकदी जमा करने की कोई सीमा नहीं होगी। साथ ही, बिना किसी वार्षिक रखरखाव शुल्क (AMC) के मुफ्त एटीएम-कम-डेबिट कार्ड और चेकबुक की सुविधा मिलेगी।
- डिजिटल लेनदेन फ्री: UPI, NEFT और RTGS जैसी डिजिटल पेमेंट्स पर कोई भी हिडन चार्ज नहीं लगेगा और महीने में 4 बार एटीएम से नकद निकासी बिल्कुल मुफ्त होगी।
आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल भी होगी टैक्स रडार पर
आयकर विभाग ने टैक्स चोरी रोकने के लिए आधुनिक तरीका अपना लिया है। नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत अब करदाताओं की ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ को ट्रैक किया जाएगा।
- नियम: यदि कोई व्यक्ति अपने ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) में आय कम दिखाता है, लेकिन सोशल मीडिया पर महंगी कारों या विदेश यात्राओं की तस्वीरें साझा करता है, तो विभाग बैंक डेटा और सोशल मीडिया गतिविधियों का मिलान करेगा। विसंगति पाए जाने पर ‘आय का स्रोत स्पष्ट करें’ (Source of Wealth) का नोटिस भेजा जा सकता है।
10 लाख से अधिक के नकद लेनदेन पर ऑटो-रिपोर्टिंग
आयकर विभाग ने उच्च मूल्य वाले नकद लेनदेन पर निगरानी सख्त कर दी है।
- निगरानी: बचत खाते (Savings Account) में एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक की नकद जमा या निकासी की जानकारी बैंक द्वारा स्वचालित रूप से आयकर विभाग को भेज दी जाएगी।
- अन्य नियम: 1 लाख रुपये से अधिक का क्रेडिट कार्ड बिल यदि नकद भरा जाता है, तो उसे तुरंत फ्लैग कर दिया जाएगा। रियल एस्टेट में नकद लेनदेन पर 100% तक जुर्माना लग सकता है।
ULIP पॉलिसी पर अब टैक्स छूट का लाभ नहीं
अब यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) को बीमा से ज्यादा निवेश के रूप में देखा जाएगा।
- बदलाव: जिन ULIP पॉलिसियों का सालाना प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से अधिक है, उन पर धारा 10(10D) के तहत मिलने वाली टैक्स छूट खत्म कर दी गई है। 1 साल से अधिक समय तक होल्ड करने पर इन पर इक्विटी म्यूचुअल फंड की तरह 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगेगा।
F&O ट्रेडिंग करने वालों के लिए बढ़ा खर्च
शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वाले सक्रिय ट्रेडर्स के लिए नियम कड़े किए गए हैं।
- टैक्स बढ़ोतरी: फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 150% बढ़ा दिया गया है। इसी तरह ऑप्शंस ट्रेडिंग पर भी प्रीमियम टैक्स बढ़ा है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म इक्विटी डिलीवरी वाले निवेशकों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।
निष्कर्ष:
ये सभी नए नियम स्पष्ट संकेत देते हैं कि सरकार वित्तीय प्रणाली को अधिक डिजिटल, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। आम नागरिकों को इन नियमों के प्रति जागरूक रहना चाहिए ताकि वे किसी भी असुविधा से बच सकें और नई सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
